भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

Hindi Paribhashik Laghu Kosh (CHD)

Central Hindi Directorate (CHD)

अंत:पुर

(पुं.) (तत्.)

भीतरी निवास; राजमहल का भीतरी भाग जहाँ रानियों और उनकी परिचारिकाओं के निवास की व्यवस्था रहती थी; जनानखाना।

अंत:प्रेरणा

(स्त्री.) (तत्.)

किसी कार्य को करने के लिए मन के भीतर से उठने वाला सहज विचार; सहज बुद्धि।

अंत:श्‍वसन

(पुं.) (तत्.)

शा.अर्थ साँस अंदर लेना या खींचना। जीव. श्‍वसन क्रिया में वायुमंडल की ऑक्सीजन के शरीर के अंदर फेफड़ों तक पहुँचने/पहुँचाए जाने की क्रिया। inspiration विलो. बहिर्श्‍वसन, दे. श्‍वसन।

अंत:संबंध

(पुं.) (तत्.)

दो या दो से अधिक वस्तुओं के बीच पाया जाने वाला परस्पर संबंध।

अंत:स्थ

(वि.) (तत्.)

1. भीतर या बीच का 2. अंत में स्थित भाषा (पुं.) संस्कृत व्याकरण परंपरा में य र ल व ये चार वर्ण (जिनका स्थान स्वरों और व्यंजनों के बीच माना जाता है।)

अंत:स्रवण

(अ.क्रि.) (तत्.)

शा.अर्थ भीतर की ओर बहना; अंदर ही अंदर (बाहर नहीं) बहना। (पुं.) आयु. पीयूष आदि अंत:स्रावी ग्रंथियों द्वारा हार्मोनों का प्रवाह जो सीधे रुधिर प्रवाह में मिल जाता है।

अंत:स्राव विज्ञान

(पुं.) (तत्.)

जीव विज्ञान की वह शाखा जिसमें हार्मोनों के स्रवण, प्रकृति, प्रभाव आदि का अध्ययन किया जाता है। endocrinology

अंत:स्रावी ग्रंथि

(स्त्री.) (तत्.)

प्राणि. मनुष्य एवं जंतुओं की जैव (शारीरिक) क्रियाओं के नियमन के लिए रुधिर प्रवाह में हार्मोनों का स्रवण करने वाली ग्रंथि। उदा. अग्न्याशय में लैंगर हैन्स द्वीप नामक ग्रंथि जो इन्सुलिन का स्राव करती है। endocrine gland

अंत:स्रावी

(पुं.) (तत्.)

शा.अर्थ अंदर की ओर अर्थात्, भीतर बहने वाली प्राणि. (ग्रंथि के संबंध में) सीधे रुधिर प्रवाह में स्रवण करने वाली।

अंत1

(अव्य.) (तत्.)

अंदर की ओर का, मध्य भाग में टि. हिंदी में सामान्यतया उपसर्ग के रूप में प्रयोग होता है। जैसे : अंत:करण, अंतर्मन, अंत:पुर, अंतस्तल।

अंत2

(पुं.) (तत्.)

1. वह स्थान जहाँ कोई वस्तु समाप्‍त होती है। पर्या. छोर, सिरा, सीमा 2. समाप्‍त होने का भाव पर्या. समाप्‍ति 3. नष्‍ट होने का भाव पर्या. नाश, मृत्यु end 4. फल, परिणाम result

अंतत:

(क्रि.वि.) (तत्.)

1. अंत में 2. सारे उपाय कर चुकने पर 3. आखिर में। पर्या. अंततोगत्वा।

अंततोगत्वा

(अव्य.) (तत्.)

शा.अर्थ अंत में जाकर; आखिरकार, अंतत:।

अंतरंग

(अव्य.) (तत्.)

शा.अर्थ भीतर के अंग (यानी हृदय) जैसा। वि. 1. निकट का, घनिष्‍ठ, आत्मीय। जैसे : अंतरंग मित्र। 2. भीतरी। जैसे : अंतरंग विभाग।

अंतर

(पुं.) (तत्.)

1. दो या दो से अधिक वस्तुओं, व्यक्‍तियों, विचारों, स्थानों आदि के बीच का अंतर। difference जैसे : तुम्हारे और मेरे/हमारे विचारों में भारी अंतर है। 2. परिवर्तन change जैसे : ज्यों-ज्यों उसके विचार परिपक्व होते गए, त्यों-त्यों उसके व्यवहार में अंतर आता गया। 3. उपसर्ग- दो या दो से अधिक के बीच। जैसे : अंतरराष्‍ट्रीय संबंध (कई राष्‍ट्रों के बीच स्थापित संबंध), अंतरविश्‍वविद्यालयी प्रतियोगिता (कई विश्‍वविद्यालयों के बीच हुई प्रतियोगिता)।

अंतरण

(पुं.) (तत्.)

बदलना, बदलाव, एक स्थिति से दूसरी स्थिति में परिवर्तन का भाव, एक हाथ से दूसरे हाथ में जाना या एक स्थान से दूसरे स्थान में हुआ परिवर्तन। जैसे : (पुस्तक का) हस्तांतरण, (अधिकारी का) स्थानांतरण आदि।

अंतरतम

(वि.) (तत्.)

अत्यंत निकट का; आत्मीय, अत्यंत विश्‍वस्त, जिस पर पूरा भरोसा किया जा सके। उदा. मनोहर मेरा अंतरतम मित्र है।

अंतरा

(अव्य.) (तत्.)

निकट; मध्य। पुं. (संगीत) किसी गीत के स्थायी (टेक) को छोडक़र शेष चरण जिन्हें स्थायी की अपेक्षा ऊँचे/तीव्र स्वर में गया जाता है।

अंतरात्मा

(स्त्री.) (तत्.)

पंच भौतिक शरीर के अंदर स्थित आत्मा या जीवात्मा। चेतनशक्‍ति। पर्या. 1. आत्मा, 2. अंत:करण, 3. जीवात्मा।

अंतराल

(पुं.) (तत्.)

समय के स्तर पर दो बिंदुओं के बीच की दूरी। उदा. लंबे अंतराल के बाद हम लोगों की भेंट हुई (समय का अंतराल)। तु. दूरी (स्थान का अंतराल)
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